Monday, March 16, 2009

तुम याद आये..पर क्या खूब याद आये!

वो हसीन पल याद कुछ ऐसे आये
किसी और के चहरे से तुम तक फिर हम आये
वो इन्सान जो हमें पहचान तो ना पाये
शुक्रिया उनका, जो धूप में तुम्हारी छाँव लाये
दो आँसू फिर आँखों में छलक आये
क्या हम भी तुम्हें याद आये?
हज़ार ख्याल कौंध गये
बरसात के दिन जैसे आये
खिडकी के शीशे वो बाँहें फैलाये
आँखों में तुम्हारा अक्स जैसे दिख जाये
भीड के बीच गहरी साँस लिये
होंठों पे तुम्हारा नाम लाये
पर ज़ुबान भी लड्खडाये
ज़िन्दगी के मोड पे तज्जुब सा हो जाये
जानकर खुश हुए?
कि आज भी तुम्हारी अवाज़ दिल को छू जाये..
आज एक अरसे बाद हम मुस्कुराये
प्यार के वो दीवाने एहसास लौट आये
:)..इतने सवाल ज़हन में उठ आये
क्यूँ ये सब तब याद ना आये
इश्वर का शुक्रिया जो किसी का कुछ गुम जाये
इसी बहाने से सही हम उन्हें याद आये
उस रोज़ तुम हमें याद आये..
क्या मालुम्..क्या खूब् याद आये!